Monday, December 17, 2018

मोदी क्यों हारे? ये बताने वाले कथित न्यूयॉर्क टाइम्स के आर्टिकल का सच

सोमवार को जब कांग्रेस के तीन मुख्यमंत्रियों ने अपने-अपने सूबे की शपथ ली, तब कुछ दक्षिणपंथी रुझान वाले फ़ेसबुक पेज और ग्रुप एक लेख शेयर कर रहे थे.

उनका दावा था कि अमरीकी अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स ने पाँच राज्यों के विधानसभा चुनाव की विवेचना कर मुख्य कारणों की एक फ़ेहरिस्त तैयार की है कि आख़िर भारतीय जनता पार्टी और मोदी खेमे को इन चुनावों में हार का सामना क्यों करना पड़ा.

शेयर किए जा रहे आर्टिकल के अनुसार न्यूयॉर्क टाइम्स ने भारतीय वोटर्स के पैटर्न को समझाने की कोशिश की है और बताया है कि मौजूदा मोदी सरकार को इन नतीजों से क्या सबक लेने चाहिए.

ये 'आर्टिकल' तस्वीर और टेक्स्ट के तौर पर अंग्रेज़ी समेत हिन्दी में भी पोस्ट किया गया है. साथ ही इसे व्हॉट्सऐप पर भी शेयर किया जा रहा है.

कुछ लोगों ने इस आर्टिकल का लब्बोलुआब लिखा है कि 'भारतीय वोटर बेहद संकीर्ण मानसिकता के हैं जो हमेशा शिक़ायत करते रहते हैं. साथ ही उन्हें अपनी समस्याओं के हल तुरंत चाहिए, वो लंबी योजनाओं में विश्वास नहीं करते.'

इस कथित आर्टिकल में और क्या-क्या लिखा है?
भारतीयों की नज़र में हर काम सरकार का काम है और उन्हें अपनी समस्याओं के 'लॉन्ग टर्म हल' नहीं चाहिए.
भारतीयों की याद्दाश्त कमज़ोर है और उनका दृष्टिकोण बहुत ही संकीर्ण.
वो पुरानी बातें भूल जाते हैं और नेताओं के पिछली ग़लतियों को माफ़ कर देते हैं.
भारतीय ढीठ होकर जातिवाद पर वोट करते हैं. जातिवाद एक मुख्य शत्रु है जो युवाओं का उत्थान नहीं होने देता और उन्हें बाँटता है.
चीन और पाकिस्तान में जातिवाद फ़ैलाने की कोशिश करते हैं, क्योंकि दोनों ही GDP के लिये भारतीय बाज़ार पर निर्भर हैं.
लोगों को सस्ता डीजल चाहिए, कर्ज़ माफ़ी चाहिए, लेकिन 'सबका साथ, सबका विकास' वो नहीं जानते.
वो सिर्फ़ अपनी पॉकेट में आये धन को जानते हैं.
भारत में जीतने के लिए मोदी को स्टेट्समैनशिप छोड़कर, पॉलिटिशियन बनना होगा.
इस लेख के अंत में लिखा है कि नरेंद्र मोदी ने बतौर पीएम बहुत काम किया है, लेकिन भारत के लोग उनके काम की प्रशंसा नहीं कर रहे.

इस लेख की सच्चाई
अपनी पड़ताल में हमने पाया कि लेख बताकर शेयर की जा रही ये पोस्ट फ़र्ज़ी है.

फ़ेसबुक सर्च से पता चलता है कि 11 दिसंबर के बाद से इस पोस्ट को न्यूयॉर्क टाइम्स का आर्टिकल बताकर शेयर किया जा रहा है.

लेकिन 'नरेंद्र मोदी' और 'विधानसभा चुनाव 2018' जैसे की-वर्ड्स से सर्च करने पर ये साफ़ हो जाता है कि न्यूयॉर्क टाइम्स ने ऐसा कोई आर्टिकल नहीं लिखा है जिसमें विधानसभा चुनावों की विवेचना कर भाजपा की हार के कारण बताए गए हों और भारतीय लोगों के लिए ऐसी भाषा में तो कोई लेख अमरीकी साइट पर क़तई नहीं लिखा गया है.

भाषाई बारीकी पर उतरें तो इस पोस्ट में लिखी गई अंग्रेज़ी बहुत ग़लत है. अंग्रेज़ी के "caste" और "promote" जैसे सरल शब्द भी ग़लत लिखे हुए हैं.

सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इसका मज़ाक भी बनाया है. लेकिन भाषाई स्टाइल अमरीकी अख़बार की स्टाइल शीट से बिल्कुल मेल नहीं खाता.

दिलचस्प है कि ये कथित लेख भाजपा की हार के लिए जनता को ही दोषी ठहराता है. जबकि भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने भी पाँचों राज्यों में चुनावी जनादेश का आगे बढ़कर स्वीकार किया है.

Friday, December 14, 2018

रणबीर संग र‍िश्ते पर बोलीं आल‍िया भट्ट, 'सवाल सुनकर आती है शर्म'

अभिनेत्री आलिया भट्ट का कहना है कि उन्हें 'ब्रह्मास्त्र' के सह-कलाकार रणबीर कपूर के साथ अपने रिश्ते को लेकर बात करने में शर्म आती है. आलिया ने गुरुवार को निकलोडियन किड्स चॉइस अवॉर्डस 2018 में यह बात कही.

हाल ही में एक साक्षात्कार में, आलिया के फिल्म निर्माता पिता ने भी कहा था कि उन्हें खुशी है कि उनकी बेटी रणबीर के साथ रिलेशनशीप में है.

यह पूछे जाने पर कि वह रणबीर के साथ अपनी रिलेशनशिप को पिता से मिली स्वीकृति को कैसे देखती है, आलिया ने कहा, "आप भविष्य में क्यों जा रहे हैं? आपको वर्तमान में रहना चाहिए. ईमानदारी से कहूं तो मैं इस बारे में बात नहीं करना चाहती." उन्होंने कहा, "मुझे शर्म आ रही है, लेकिन मैं अपने पिता से प्यार करती हूं और वह जो कुछ कहते हैं वह मेरे लिए बहुत मायने रखता है, लेकिन मैं अभी इस बारे में बात नहीं करना चाहती."
यह पूछे जाने पर कि जाह्नवी और सारा के आने के बाद उन्हें 'सीनियर' कहे जाने पर कैसा लगता है. इस पर उन्होंने कहा, "मैं सीनियर नहीं हूं. अगर आप इसे सीनियर कहते हैं, तो मैं उनके लिए सीनियर हूं, लेकिन मुझे नहीं लगता कि हमारे बीच ऐसा कोई फर्क है और वो मुझसे ज्यादा छोटी नहीं हैं."

बता दें कि आल‍िया और रणबीर पहली बार फिल्म ब्रह्मास्त्र में साथ काम करते नजर आएंगे. ये फिल्म 2019 में र‍िलीज होगी. दोनों के र‍िलेशनश‍िप की खबरें बॉलीवुड में चर्चा में बनी हुई है.

भारतीय बाजार में अब तक फिल्म ने करीब 42 करोड़ रुपये कमा लिए हैं. हालांकि पहले हफ्ते में ये फिल्म 50 करोड़ रुपये कमाने से चूक गई. इसे हिट बताया जा रहा है. फिल्म की लागत करीब 35 करोड़ है.  कुछ रिपोर्ट्स में लागत 55 करोड़ से ज्यादा बताया जा रहा है.

क्या है फिल्म की कहानी?

फिल्म की कहानी लवस्टोरी है जिसे केदारनाथ की त्रासदी के केंद्र में बुना गया है. केदारनाथ की कहानी एक हिंदू पंडित की बेटी मंदाकिनी उर्फ़ मुक्कु (सारा अली खान) से शुरू होती है जो की बेहद जिद्दी, खुशमिज़ाज़ और अल्हड़ हैं. मुक्कु को एक मुस्लिम पिट्ठू (तीर्थयात्रियों को कंधे पर उठानेवाला) मंसूर (सुशांत सिंह राजपूत) से प्यार हो जाता है. दो अलग धर्म के लोगों का प्यार वादी के लोगों को पसंद नहीं आता और फिर इस प्यार को तोड़ने की भरपूर जद्दोजहद शुरू हो जाती है. इस पूरी कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब मंदाकिनी और मंसूर के प्यार को तोड़ने के लिए पंडितों और पिट्ठुओं के बीच जंग छिड़ जाती है और इसी बीच कुदरत भी अपना कहर बरपा देता है.

Tuesday, December 11, 2018

长生生物拟被强制退市 高俊芳等人终身禁入市场

中新网12月11日电 长生生物科技股份有限公司今日发布公告称,中国证监会对公司信息披露违法违规事项已调查、审理终结,并对公司及相关当事人进行了相应处罚。证监会决定:对高俊芳、张晶、刘景晔、蒋强华采取终身市场禁入措施。深交所拟对公司股票实施重大违法强制退市。

  2018年12月11日,长生生物科技股份有限公司公告称,收到中国证监会《行政处罚决定书》,相关人员收到中国证监会《市场禁入决定书》。中国证监会对公司信息披露违法违规事项已调查、审理终结,并对公司及相关当事人进行了相应处罚。

  长生生物科技股份有限公司将有关情况公告如下:

  公司存在未按规定披露相关产品抽验不合格、全面停产及召回的信息以及相关产品有关情况的公告存在误导性陈述及重大遗漏;未披露被吉林省食药监局调查的信息;未披露长春长生相关产品GMP证书失效和重新获得GMP证书以及2015年至2017年报及内部控制自我评价报告存在虚假记载等问题。

  证监会依法对公司上述行为进行了立案调查、审理,相关案件现已调查、审理终结。根据当事人违法行为的事实、性质、情节与社会危害程度,依据《证券法》第一百九十三条第一款的规定,证监会决定:

  一、对长生生物责令改正,给予警告,并处以60万元罚款;

  二、对高俊芳、张晶、刘景晔、蒋强华给予警告,并分别处以30万元罚款;

  三、对张友奎、赵春志、张洺豪给予警告,并分别处以20万元罚款;

  四、对刘良文、王祥明、徐泓、沈义、马东光、鞠长军、万里明、王群、赵志伟、杨鸣雯给予警告,并分别处以5万元罚款。

  此外,根据《证券法》第二百三十三条和《证券市场禁入规定》(证监会令第115号)第三条第(一)项、第五条和第六条的规定,证监会决定:对高俊芳、张晶、刘景晔、蒋强华采取终身市场禁入措施;对张友奎、赵春志、张洺豪采取5年市场禁入措施。

  同日,长生生物科技股份有限公司发布公告称,12月11日,收到《深圳证券交易所重大违法强制退市事先告知书》,深交所拟对公司股票实施重大违法强制退市。

肺炎疫情:国际呼声高涨下,中国拒绝就新冠病毒溯源调查让步

面对国际上不断高涨的呼吁,要求就新型 英国首相约 色情性&肛交集合 翰逊在感染新型冠 色情性&肛交集合 状病毒康复两 色情性&肛交集合 周后, 色情性&肛交集合 将回到唐宁街继续 色情性&肛交集合 他的全职 色情性&肛交集合 领导工作。 在首相生病期 色情性&肛交集合 间代...